Report a comment as inappropriate

You are reporting the following comment by पवन प्रणव on this page.

"इसमें कोई शक नहीं है कि यह फिल्म बेहद सोचनीय है। यह आपके दिमाग की चूलें हिला देती है। इस फिल्म को देखकर जो मैं समझ पाया हूं वह यह कि -- फिल्म की शुरुआत एक घर से होती है, जिसमें एक मां और उसके बेटे को दिखाया जाता है। बेटा दिमागी रूप से बीमार होता है। चूंकि मां अकेले अपने लड़के और घर की जिम्मेदारी संभालती है इसलिए वह भी बेहद परेशान रहती है। उसे उस दिन अपने दोस्त की नाव पर सैर करने भी जाना होता है। वह अपने बच्चे को तैयार कर स्कूल ले जाती है। रास्ते में अपने बच्चे वह कहती भी है कि वह अब उसके साथ गुस्से से पेश नहीं आएगी। लेकिन इसी बीच बच्चे से बातचीत के दौरान उसकी कार का एक्सिडेंट हो जाता है। उसके बाद उनदोनों की मौत हो जाती है। फिल्म की मूल कहानी यहीं तक है। इसके बाद फिल्म की सारी कहानी हीरोइन की कल्पनाओं की उड़ान होती है। चूंकि वह अपने बच्चे को किसी भी कीमत पर बचाना चाहती है।"

Please state your reason

Email
Reason *
* mandatory fields